भारत विविधताओं का देश है, जहाँ हर त्योहार अपने साथ कोई न कोई कहानी, परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव लेकर आता है। इन्हीं त्योहारों में से एक है लोहड़ी (Lohri) — जो विशेष रूप से पंजाब की मिट्टी, संस्कृति और किसानों की मेहनत से जुड़ा हुआ पर्व है। यह त्योहार केवल आग, गीत और नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे इतिहास, लोककथाएँ, प्रकृति-पूजन और सामाजिक एकता की गहरी भावना छिपी हुई है।
लोहड़ी मुख्य रूप से सर्दियों के अंत, माघ महीने की शुरुआत और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। यह पर्व हर साल 12 या 13 जनवरी के आसपास मनाया जाता है, जब सूर्य अपनी दिशा बदलता है और उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है।
पंजाब में कहा जाता है – “लोहड़ी आई, ठंड भगाई” — यानी अब ठंड का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा और खेतों में नई उम्मीदें लहलहाने लगेंगी। 🌾
लोहड़ी का Origin (उत्पत्ति) कैसे हुआ?
लोहड़ी की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत और लोककथाएँ प्रचलित हैं। लेकिन सबसे लोकप्रिय और भावनात्मक कथा दुल्ला भट्टी से जुड़ी हुई है।
दुल्ला भट्टी की कहानी – लोकनायक से लोहड़ी तक
कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में पंजाब में एक व्यक्ति था — दुल्ला भट्टी। वह पेशे से राह लुटेरा माना जाता था, लेकिन दिल से एक रॉबिन हुड जैसा था। वह अमीरों को लूटता और गरीबों की मदद करता था।
उस समय कुछ विदेशी गुलाम व्यापारी हिंदू लड़कियों को जबरदस्ती उठाकर मिडिल ईस्ट के गुलाम बाजारों में बेच दिया करते थे। दुल्ला भट्टी ऐसे मामलों में उन लड़कियों को छुड़ाता था और उन्हें अपनी बेटियों की तरह सम्मान देता था।
वह उन लड़कियों की हिंदू रीति-रिवाज से शादी करवाता था। कई बार जंगल या सड़क किनारे ही लकड़ियाँ जलाकर अग्नि के चारों ओर फेरे करवा दिए जाते थे। दुल्ला भट्टी दहेज में गुड़, चूरी, मूंगफली, पॉपकॉर्न देता था।
लोग उसे प्यार से “दुल्ला भट्टी चाचा” कहते थे। वह शादी के समय सुरक्षा के लिए अपने मुस्लिम साथियों को तैनात करता था। इस तरह वह हिंदू–मुस्लिम एकता का प्रतीक बन गया।
इसी महान कार्य के सम्मान में पंजाब के लोगों ने लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भट्टी को अमर कर दिया। आज भी लोहड़ी के गीतों में उसका नाम गूंजता है।
लोहड़ी गीत में छिपी दुल्ला भट्टी की कहानी
लोहड़ी के अवसर पर बच्चे और युवा घर-घर जाकर ढोल की थाप पर गीत गाते हैं और लोहड़ी माँगते हैं। खाली हाथ लौटाना अशुभ माना जाता है।
लोकप्रिय पंजाबी लोहड़ी गीत
Sunder mundriye ho!
Tera kaun vicaharaa ho!
Dullah bhatti walla ho!
Dullhe di dhee vyayae ho!
Ser shakkar payee ho!
Kudi da laal pathaka ho!
Kudi da saalu paatta ho!
Salu kaun samete!
Chache choori kutti! zamidara lutti!
Zamindaar sadhaye!
Bade bhole aaye!
Ek bhola reh gaya!
Sipahee far ke lai gaya!
Sipahee ne mari eet!
Sanoo de de lohri, te teri jeeve jodi!
गीत का हिंदी अर्थ
ओ सुंदर लड़की! तुम्हारा ध्यान कौन रखेगा?
दुल्ला भट्टी रखेगा।
उसने अपनी बेटी की शादी करवाई।
दहेज में शक्कर दी।
लड़की ने लाल सूट पहना है।
उसकी शाल फटी हुई है।
कौन सिलेगा शाल?
चाचा ने चूड़ियाँ दीं।
जमींदारों ने लूटा।
जमींदारों को सज़ा मिली।
एक मासूम पीछे रह गया।
सिपाही उसे पकड़ ले गया।
हमें लोहड़ी दो, तुम्हारी जोड़ी सलामत रहे।
यह गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और साहस की कहानी है।
लोहड़ी का धार्मिक और खगोलीय महत्व
लोहड़ी सूर्य और अग्नि पूजा से जुड़ा हुआ पर्व है। इस दिन सूर्य अपनी दिशा बदलता है और उत्तरायण होता है। इसे शुभ माना जाता है।
अग्नि को साक्षी मानकर तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी अग्नि में अर्पित की जाती है। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा की जाती है और मनोकामनाएँ मांगी जाती हैं।
कुछ मान्यताओं के अनुसार:
- लोहड़ी का नाम संत कबीर की पत्नी लोई से जुड़ा है।
- कुछ लोग इसे ‘लोह’ (लोहे के तवे) से जोड़ते हैं।
- एक कथा में लोहड़ी को होलिका की बहन बताया गया है।
लोहड़ी के प्रमुख रीति-रिवाज
- बड़े अलाव (Bonfire) जलाना 🔥
- तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली चढ़ाना
- ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा 💃
- बच्चों का घर-घर जाकर लोहड़ी माँगना
- गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकना
पंजाबी घरों में कहा जाता है – “ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਲੱਖ ਲੱਖ ਵਧਾਈਆਂ!” Lohri diyan lakh lakh vadhaiyan!।
पहली लोहड़ी का विशेष महत्व
- नवविवाहित दुल्हन की पहली लोहड़ी
- नवजात शिशु (लड़का या लड़की) की पहली लोहड़ी
इन अवसरों पर घर में विशेष उत्सव होता है, रिश्तेदार मिठाइयाँ और उपहार लाते हैं।
लोहड़ी का सामाजिक संदेश
लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि:
- भाईचारे 🤝
- एकता ☮️
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता 🌞
- नई शुरुआत 🌱
का प्रतीक है। यह त्योहार सिख, हिंदू और मुस्लिम — सभी को एक सूत्र में बाँधता है।
निष्कर्ष
लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? इसका उत्तर केवल एक पंक्ति में नहीं दिया जा सकता। यह त्योहार इतिहास, लोककथा, प्रकृति और मानवीय मूल्यों का संगम है। दुल्ला भट्टी की कहानी, सूर्य पूजा, फसल का स्वागत और पारिवारिक खुशी — सब मिलकर लोहड़ी को खास बनाते हैं।
लोहड़ी दी लाख-लाख बधाइयाँ!
रब करे, यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। 🙏
